बाराबंकी(नितेश मिश्रा)। आज से लगभग 6 वर्ष पूर्व शिक्षक संगठनों की अनदेखी के कारण मृतक आश्रित कर्मचारी संघ की नींव रखी गई। चूंकि बेसिक शिक्षा विभाग में 26 जुलाई 2011 से उच्च योग्यताधारी मृतक आश्रित को चतुर्थ श्रेणी में नियुक्ति दी जाने लगी। जिसका विरोध लगातार मृतक आश्रित कर रहे थे और शिक्षक संगठनों से इस अन्याय के लिए लगातार गुहार लगा रहे थे कि हमारी समस्याओं को हल कराएं शासन पर, मगर शिक्षक संगठन कान में तेल डाले बैठा था। उसको यह लगता था कि हम कभी मरेंगे ही नहीं और न हमारे आश्रित कभी चतुर्थ श्रेणी पर आएंगे। लगातार हो रही अनदेखी से परेशान होकर सन 2015 में मृतक आश्रित कर्मचारियों ने अपना एक संगठन बनाया और लड़ाई चालू की शुरुआत में सभी शिक्षक संगठनों के लोगों से जब मैं मिलता था तो उनका सिर्फ एक ही कथन होता था इस लड़ाई में कुछ नहीं है न कभी जीत पाओगे मगर कहते नहीं है कि जिसको किसी चीज को पाने की जब चाहत होती है तो ऊपर वाला भी उसे मिलाता है बस दिमाग में एक चीजें चलती रही 3.5 लाख शिक्षकों के आश्रितों और जो लगभग 5000 जो लोग उच्च योग्यता रखकर चतुर्थ श्रेणी में नियुक्त हो गए हैं। उन लोगों को कैसे न्याय दिलाया जाए और उनकी योग्यताओं को कैसे सम्मान दिलाया जाए।
इसी को लेकर संगठन पिछले 6 सालों से लगातार संघर्ष कर रहा था। संगठन ने इस लम्बी लड़ाई में अनेको धरना प्रदर्शन किया विधानसभा घेराव तथा एनेक्सी का घेराव किया जिसमें दो दर्जन से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे हुए फिर भी मृतक आश्रित कर्मचारी संघ ने शासन स्तर पर अपनी मांग को कभी दबने नही दिया हर विभाग से हमारी फाइल पर हमारे पक्ष में अभिमत प्राप्त हुआ 09 सितम्बर 2019 की बैठक में ये तय हुआ था कि जो नए मृतक आश्रित आने है उनके आदेश को पहले निर्गत कर दिया जाएगा उसके बाद कार्यरत मृतक आश्रितों का आदेश निर्गत होगा। मार्च 2021 में अपर् मुख्य सचिव श्रीमती रेणुका कुमार ने भी इस बात पर सहमति देते हुए ये कहा था कि नए मृतक आश्रित के आदेश निर्गत होने के तुंरत बाद कर्मचारियों पर निर्णय लेकर आदेश निर्गत किया जाएगा।संघर्ष की वजह से आज एक बड़ी सफलता संगठन को प्राप्त हुई।
एक अहम और सराहनीय निर्णय के लिए उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष जुबेर अहमद ने बेसिक शिक्षा मंत्री, अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक का आभार व्यक्त किया।