औरैया (दीपक कुमार पाण्डेय) ।यू एम पावर कोयला सयंत्र से प्रभावित किसानों का सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा न मिलने से आक्रोश फुट पड़ा ।और प्रोजेक्ट के अधिकारियों पर प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया । प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों ने बताया कि कंचौसी, जमौली,सेहुद ,करौंधा सूखमपुर हरतौली ढिकियापुर करीब सात गांवों के किसानों की दो सौ पचास एकड़ जमीन औने पौने दामों में तमाम प्रकार के लालच देकर बैनामा करवा लिया ।वादा खिलाफी कर अपने किये हए वायदों से मुकर गए।अधिकारियों द्वारा प्रभावित किसानों के परिवारों को एक व्यक्ति को नौकरी देने का वायदा भी किया था वो भी नही दी।सन दो हजार ग्यारह में किसानों को तमाम प्रकार के वायदे कर किसानों से भूमि हड़प ली ।और करीब पचास प्रतिशत किसानों को उचित मुआवजा भी नही मिला ।कई बार भुगतान को लेकर किसानों और प्रोजेक्ट के अधिकारियों में झड़प भी हुई लेकिन आज तक कोई निष्कर्ष नही निकला ,तो किसान अपनी समस्या लेकर डीएम के दरबार मे भी पहुंचे लेकिन कोई न्याय नही मिला ।कई बार किसानों द्वारा सत्ता पक्ष के जन प्रतिनधियों को भी अवगत कराया लेकिन किसानों की एक भी बात नही सुनी गई।कुछ जमीन गैर कानूनी तरीके से जबरन अधिग्रहित कर ली जिसका किसानों को आज तक मुआवजा भी नही मिला।जबकि कुछ किसानों ने हाईकोर्ट में मुकदमा भी कर दिया है।किसानों ने बताया लॉक डाउन के चलते प्रोजेक्ट में कार्य भी शुरू कर दिया गया है।किसानों की जमीनें चली जाने के कारण उनके परिवारों में आर्थिक संकट भी पैदा हो गया है।किसान जब अपना मुआवजा प्रोजेक्ट के अधिकारियों से मांगते है तो उल्टा उनको धमका कर भयभीत कर दिया जाता है।और कहा जाता है कि मुकदमा लगवा दिया जाएगा तो सही हो जाओगे। सबसे बड़ी बात यह है कि 9 वर्ष हो चुके है। शासन द्वारा निर्धारित प्लांट लगाने का समय भी समाप्त हो चुका है।इसके बाबजूद भी शासन प्रशासन के आदेशों की धज्जियाँ उड़ाकर प्रोजेक्ट को जबरन बिना किसी मुआवजा दिए किसानों की जमीनों पर अपना कब्जा जमाए है।किसान सुघर सिंह,सर्वेश कुमार,घनश्याम बाबू,सोनेलाल,घनश्याम, अभयराम,अनिल कुमार ,कमल सिंह, नन्द किशोर, हरीबाबू रामकुमार,लाल सिंह,प्रमोद कुमार,निरपत सिंह,रामनरायन,भूरे,नरेंद्र सिंह, रामशंकर , आदि किसानों ने साफतौर पर कहा कि किसानों का सिधाई का नजायज फायदा प्रोजेक्ट न उठाएं ।किसानों का अगर गुस्सा फूट गया तो संभालना भी मुश्किल होगा।