कानपुर (नारायण शुक्ला)
सार

ब्लैक फंगस संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा कोरोना से ठीक हुए मरीजों को है। जो रोगी मिल रहे हैं उनकी जांच से पता चला है कि संक्रमण मुंह से साइनस, आंखों और मस्तिष्क तक पहुंच रहा है।

विस्तार

ब्लैक फंगस का संक्रमण मुंह से जल्दी फैलता है। जो रोगी मिल रहे हैं उनकी जांच से पता चला है कि संक्रमण मुंह से साइनस, आंखों और मस्तिष्क तक पहुंच रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि पान मसाला खाने वाले कोरोना विजेता खासतौर पर सतर्क रहें। इसकी वजह से मुंह की खाल कमजोर हो जाती है जिससे फंगस को घुसने में आसानी होती है।

इसके अलावा ऐसे कोविड रोगी जो पहले से पायरिया, मसूड़ों के संक्रमण, सब म्युकस फाइब्रोसिस, मुंह के छाले, ल्यूकोप्लेसिया (सफेद चकत्ता) चपेट में रहे हैं, वे भी मुंह की जांच करा लें। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह में ब्लैक फंगस शुरुआत में जल्दी पकड़ में नहीं आता है। जब मसूड़ों में सूजन होती है तालू काला पड़ने लगता है तो रोगी को पता चलता है।
अगर लापरवाही कर दी तो संक्रमण साइनस की तरफ बढ़ जाता है। यहां की नलिकाओं से यह मस्तिष्क तक चला जाता है। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट के पूर्व दंत रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंकित मेहरोत्रा और डॉ. अभिषेक दुबे ने बताया कि ब्लैक फंगस नाक की तुलना में मुंह से अधिक आसानी से घुस सकता है। अगर शुरुआत में ही जांच हो जाए तो रोगी को जटिलताएं भी नहीं होंगी और ठीक हो जाएगा।