बाराबंकी ( सुधीर निगम)।

पिता बचन मैं नगर ना आवउ।
रावण का वध होने के बाद विभीषण ने श्री राम जी से कहा अब कृपा करके नगर में चलिए मज्जन स्नान कर श्रम को दूर करिए। श्री राम जी को भारत की याद आ गई पुष्पक विमान में हनुमान अंगद सुग्रीव विभीषण आदि को साथ में लेकर अयोध्या की ओर चल पड़े, प्रयाग पहुंचकर श्री राम ने हनुमान जी से कहा विप्र रूप धारण कर मेरे आने की सूचना भरत को सुना कर शीघ्र वापस आओ। भारत के नेत्रों में जल है मुख में श्री राम नाम उच्चारण है विचार करते हैं कि शायद भैया ने मुझे कबड्डी और कुटिल ही पहचाना है14 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रभु राम जी नहीं आए और मैं जीवित रहा तो अपराध होगा इतने में हनुमान जी ने विप्र रूप धारण कर राम माता सीता मैया लक्ष्मण की सकुशल आने की सूचना देकर श्री राम जी के पास पुनः आ जाते हैं।
अवधपुरी प्रिय सम कोहू।
यह प्रसंग जाने को कोहू।।
भगवान श्री राम हनुमान आदि अयोध्या की महिमा कथा सुनाते हैं,
अयोध्या के उत्तर दिशा में बह रही सरयू में एक बार जो स्नान कर लेता है वह मेरे समीप पहुंचा जाता है।
अयोध्या पहुंचने पर पुष्पक विमान नीचे उतरा भगवान राम ने देखा भीड़ बहुत है सबसे पहले किस से मिलो तो अमित रूप प्रकट तेहि काला।
जथा जोग मिले सबई कृपाला।।
भरत और श्री राम की आंखों में अश्रु को देखकर समस्त दर्शन दर्शकों के नेत्रों में जल आ गया एवं भावविभोर के साथ संपन्न हुई भरत मिलाप की लीला