बाराबंकी ( सुधीर निगम)। लंका दहन उपरांत विभीषण जी को रावण समझाते हैं कि सीता को वापस कर दो लेकिन रावण ने लात मार कर भगा दिया, विभीषण भगवान की शरण में आता है भगवान श्रीराम ने विभीषण को शरण में लिया ,
सेतुबंध रामेश्वर भगवान शिव की स्थापना करके समुद्र में सेतु बांधा गया।
बंदरों की सेना के साथ प्रभु श्री राम समुद्र के उस पार पहुंचने के बाद अंगद से कहते हैं,
काजू हमार तासु हित होई। रिपु सन करऊ बतकही सोई।।
अंगद रावण संवाद का मंचन बहुत ही सुंदर है अंगद ने अपना एक पैर जमा करके कहा जो मेरे पैर को हिला दे तो मैं सीता और राम की सौगंध खाकर कहता हूं मैं वापस चला जाऊंगा।
सबसे बाद में रावण पैर उठाने के लिए खड़ा हुआ अंगद ने पैर हटा कर कहा पैर छूना है तो श्री राम जी के जो तुम्हारा कल्याण होग।
लक्ष्मण मेघनाद युद्ध लक्ष्मण शक्ति वैद्य सुसेन के द्वारा हनुमान जी से संजीवनी बूटी मंगवाई गई लक्ष्मण पुनः स्वस्थ हुए और मेघनाथ का वध किया,। व्याकुल होकर के रावण कुंभकरण के पास पहुंचा अनेकों प्रकार से जगाने की कोशिश करने लगा जागने के बाद कुंभकरण ने अपने भाई रावण को बहुत प्रकार से समझाया कि तुमने सीता मां का हरण करके अच्छा नहीं किया। महिष खाई करि गरजा पाना। गर्जा ब्जरघात सामना।।
मद्रा के नशे में होकर कुंभकरण राम के पास जाने लगा विभीषण के कहने पर रामजी ने कुंभकरण का वध किया।
राम रावण युद्ध प्रारंभ।
रावण रथी विरथ रघुवीरा। देख विभीषण भयो अधीरा।।रावण रथ पर सवार होकर युद्ध करने के लिए राम के सामने आया राम जी भूमि पर से युद्ध के लिए तैयार हुए यह दृश्य देखकर विभीषण जी अधीर हो गए इंद्र ने मातली को दिव्य रथ के तरीके राम की सहायता हेतु भेजा राम जी भी रथ पर सवार होकर रावण से युद्ध करने लगे रावण को बार-बार मारने से राम जी जब नहीं मार पाए तब विभीषण ने बताया किसकी नाभि कुंड में अमृत है जब तक अमृत नहीं छूटेगा तब तक रावण नहीं मरेगा रामजी ने एक बार में 31 बाण मारा। अमृत को सुखाकर आखरी बाण वक्षस्थल पर संधान कर दिया रावण के मरने समय पर रावण के शरीर से एक दिव्य तेज निकला सो राम के मुख्य में समा गया रावण की मृत्यु देखकर भगवान शंकर एवं ब्रह्मा जी आश्चर्यचकित रह गए।
तासु तेज समान प्रभु आनन। हरसे देख शंभू चतुरानन।।
अधर्म पर हुई धर्म की विजय के साथ रावण वध दशहरा कार्यक्रम संपन्न हुआ।