ऋषिकेश
नवरात्रि के महाअष्टमी के अवसर पर शनिवार को परमार्थ निकेतन की गंगा आरती में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर अजीत डोभाल ने सपरिवार शामिल हुए। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि कीर्ति चक्र से सम्मनित डोभाल ने अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आज भारत को ऐसे ही समर्पित व्यक्तित्व की आवश्यकता है, जो कि देश की गरिमा, मर्यादा, प्रतिष्ठा और समरसता को बनाए रखे।
डोभाल ने मां गंगा के तट से अपने संस्कारों और धर्म को आगे ले जाने वाले ऋषिकुमारों और देशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम राष्ट्र की सुरक्षा नहीं बल्कि राज्य की सुरक्षा करते है। राष्ट्र की सुरक्षा तो पूज्य संत करते है। पूज्य संत हमारे राष्ट्र की संस्कृति, संस्कार और आत्मा है। भारत की संस्कृति और संस्कारों का निर्माण पूज्य संतों ने किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का निर्माण आत्मशक्ति से होता है। राष्ट्र निर्माण के लिए पूज्य स्वामी जी का महत्वपूर्ण योगदान है। स्वामी विवेकानन्द जी और संतों ने हमारे राष्ट्र और राष्ट्रभक्ति को जीवंत बनाए रखा। उन्होंने कहा कि मां गंगा हमारी धरोहर है। गंगा तो पहले से ही भारत की पहचान है, परन्तु स्वामी जी ने गंगा और भारतीय संस्कृति को एक नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि हमारी युद्धनीति स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि परमार्थ के लिए है।
वहीं डोभाल ने साध्वी भगवती सरस्वती को हिन्दूधर्म विश्वकोश के 11 खंडों के प्रकाशन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इस महाग्रंथ में हिन्दू धर्म और संस्कृति की जो वैज्ञानिक व्याख्या की गई है वह अछ्वुत है। महाअष्टमी और नवमी के पावन अवसर पर मां गंगा के पावन तट पर स्वामी जी ने महाग्रंथ हिन्दूधर्म विश्वकोश की प्रति डोभाल जी को भेंट स्वरूप प्रदान की।