कानपुर (नारायण कुमार शुक्ला) कानपुर जिले के कस्बा कल्यानपुर के लव कुश पुरम में चल रही श्री मद भागवत कथा में आचार्य श्री रसिक जी महाराज और सह आचार्य सुनील बाजपेयी ने सत्संग और राम नाम की महिमा है बताई भक्त प्रहलाद चरित्र में व्यास जी ने कहा कि तोता राम राम करना सीख गया व बंदर हाथ जोड़ना सीख गया पर सज्जनों बड़ा दुख है कि मनुष्य राम नाम लेना नहीं सीखा।भक्त प्रहलाद को मारने का अनेक प्रयास किया पर मार खाकर भी राम नाम नहीं छोड़ा। लोगों ने तो माल खाकर भी राम नाम छोड़ दिया है। त्यागी संत ने कहा कि बिना लाइन लगाए ट्रेन की टिकट नहीं मिल सकती तो बिना भजन के श्रीकृष्ण कैसे मिल सकते हैं। त्यागी संत ने कहा कि सज्जनों जीवन का लक्ष्य गुरु सेवा, गौ सेवा, निष्काम भाव से संत सेवा एवं प्रभु के प्रति प्रेम भक्ति ही जीवन का सार है। यही सेवा जीवन के अंत में आपके काम आयेगी। संत ने कहा कि जिसके सिर पर ज्ञान की गंगा होती है। वह विष को पचा सकता है।बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ तथा अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह भी बताया कि यह धनसंपदा क्षणभंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करों। उन्होंने कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईष्र्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोहग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते है तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी। कथा के दौरान वामन अवतार की झांकी दिखाई गई और तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली पर श्रद्घालु भाव विभोर हो उठे।आयोजित कार्यक्रम प्रतिवर्ष गंगा मेला के पावन शुभ अवसर पर प्रारंभ होता है। जनता के सहयोग से प्रति वर्ष कार्य क्रम आयोजित किया जाता है।