औरैया (दीपक कुमार पाण्डेय) गाँव के काली माता मंदिर में करवाया गया कन्या भोज। औरैया जिले के ग्राम जमौली मे कई वर्षों से नवरात्र की नवमी के दिन कन्या भोज कराया जाता है कन्या पूजन की यह प्राचीन परंपरा है।ऐसी मान्यता है कि एक बार माता वैष्णो देवी ने अपने परम भक्त पंडित श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर उसकी न सिर्फ लाज बचाई और पूरी सृष्टि को अपने अस्तित्व का प्रमाण भी दे दिया। आज जम्मू-कश्मीर के कटरा कस्बे से 2 किमी की दूरी पर स्थित हंसाली गांव में माता के भक्त श्रीधर रहते थे। वे नि:संतान थे एवं दुखी थे। एक दिन उन्होंने नवरात्र पूजन के लिए कुँवारी कन्याओं को अपने घर बुलवाया। माता वैष्णो कन्या के रूप में उन्हीं के बीच आकर बैठ गई। पूजन के बाद सभी कन्याएं लौट गईं,लेकिन माता नहीं गईं। बालरूप में आई देवी पं. श्रीधर से बोलीं- सबको भंडारे का निमंत्रण दे आओ। श्रीधर ने उस दिव्य कन्या की बात मान ली और आस पास के गांवों में भंडारे का संदेशा भिजवा दिया। भंडारे में तमाम लोग आए। कई कन्याएं भी आई। इसी के बाद श्रीधर के घर संतान की उत्पत्ति हुई। तब से आज तक कन्या पूजन और कन्या भोजन करा कर लोग माता से आशीर्वाद मांगते हैं।इस मौके पर गाँव के अजय तिवारी, उमाकांत, महेश दुबे, आशीष, शोभित, छोटू,राजू दुबे, संजू दुबे,सोनल, विशाल, श्यामजी, ओमजी, सन्नी बाथम, बीरेंद्, अन्नू, अमन दुबे, गुड्डू रावत, नागेंद्र, राजेश, आदि लोगों ने कन्या भोज पर लोगों ने सहयोग किया। और ये प्रार्थना कि हर साल अयेसे ही कन्या भोज होता रहेगा।