बाराबंकी(नितेश मिश्रा)। बाबू भगवती सिंह समाजवादी आन्दोलन के स्तम्भ थे। वह उन लोगों में थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने में समर्पित कर दिया। वह सामाजिक कार्यों विशेष कर शिक्षा क्षेत्र में खासे सक्रिय थे। उनके निधन से राजनीति में एक बेहद ईमानदार समाजवादी ऋषि की जगह रिक्त हो गयी।
यह बात वयोवृद्ध समाजवादी नेता एवं पूर्व मंत्री व सांसद रहे बाबू भगवती सिंह के निधन पर गांधी भवन में आयोजित शोकसभा की अध्यक्षता कर रहे लोकतंत्र सेनानी कल्याण समिति के संयोजक धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने कही। 89 वर्षीय समाजवादी नेता बाबू भगवती सिंह काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। जिनका रविवार की सुबह लखनऊ में निधन हो गया।
उन्होंने आगे कहा कि बाबू भगवती सिंह ने बड़े संघर्ष के बाद राजनीति की मुख्यधारा में खुद को स्थापित किया था। वह कई बार विधायक, एमएलसी, पांच बार उप्र प्रदेश सरकार में मंत्री और सांसद भी रहे। उन्होंने बस निःस्वार्थ भाव से गरीब, मजदूर, किसान, दलित, पिछड़े और मुस्लिम के उत्थान में अपन पूरा जीवन लगा दिया।
समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि भगवती सिंह उत्तर प्रदेश में समाजवादी आन्दोलन की एक बड़ी पहचान थे। वह सोशलिस्ट पार्टी के संयुक्त सचिव थे। डॉ. राममनोहर लोहिया, राजनारायण, चन्द्रशेखर, जनेश्वर मिश्र से स्व. भगवती सिंह के आत्मीय रिश्ते रहे। जिनकी संगत में उन्होनें समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाया। स्वतंत्रता सेनानी राम सागर मिश्र के राजनीतिक वारिस भगवती सिंह ने एक जमाने में कई सत्याग्रहों में हिस्सा लिया। उन्होंने महोना और बीकेटी विधानसभा के विकास में उनका योगदान अगली पीढ़ी याद रखेगी।
विनय कुमार सिंह ने कहा कि पूर्व मंत्री बाबू भगवती सिंह मेरे पिताजी स्व. अभय राज सिंह के मित्र थे। उनके निधन से मैंने अपना संरक्षक खो दिया। समाजवादी पथ पर चलने के लिए नई पीढी को भगवती सिंह के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
इस मौके पर मृत्युंजय शर्मा, पाटेश्वरी प्रसाद, विनय कुमार सिंह, पी.के सिंह, सत्यवान वर्मा, अतीकुर्रहमान, नीरज दूबे, बाबू जमील उर रहमान, साकेत मौर्य, विजय कुमार सिंह, विराज प्रजापति, अनिल यादव, भागीरथ गौतम, लवकुश आनन्द, मनीष सिंह आदि ने दिवंगत की आत्म शान्ति की ईश्वर से प्रार्थना की।