बाराबंकी (सुधीर निगम) । माता सीता की खोज करते हुए भगवान राम आगे शबरी से मिलते हैं जो शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान देने के बाद माता सीता की बात करते हैं शबरी ने बताया कि आगे वानरों के राजा सुग्रीव जी से हमारी मुलाकात होगी और उनके पास बहुत बड़ी वानर की सेना है तो भेज करके माता सीता का पता लगवा देंगे पंपापुर के नजदीक पहुंचते ही सुग्रीव ने देखा कि वो राजकुमार आ रहे हैं मन विचलित हो गया क्या लिख के भेजे हुए तो नहीं है हनुमान से कहा तुम ब्राह्मण का रूप बनाकर के जाओ पता लगाओ ब्राह्मण के रूप में श्री हनुमान जी महाराज राम जी से भेंट करके पता पूछते हैं भगवान ने अपना पता बताया तो हनुमान जी सुग्रीव के पास लेकर के गए और अग्नि को साक्षी बनाकर के राम सुग्रीव की मित्रता करवाया पहाड़ पर रहने का कारण भगवान ने सुग्रीव से पूछा तो सारी कथा उसने बताई भगवान राम की भुजा फड़कने और भगवान राम ने कहा एक बार से मैं बाली को मार दूंगा तुम जाओगे तो करो सुग्रीव बाली को लगा तारा के कहने पर भी बाली नहीं माना और युद्ध करने लगा एक मुट्ठी के प्रहार से बाली सुग्रीव अव्वल हो करके वापस लौट आया लेकिन भगवान राम ने दोबारा के लिए भेजा वो वाली सुग्रीव को मारना चाहा इतने में भगवान राम ने एक बाण से बाली के ऊपर प्रहार करके घायल कर दिया बाली ने भगवान राम को कहां किस कारण से चुपके वार किया है भगवान राम बहुत सुंदर बात कहते हैं भाई की बहन सम्मान ही होती हैं बाली ने कहा मेरा पुत्र अंगद आप की शरण में उनके लिए मैं आगे की रास्ता प्रस्थान करता हूं बाली को राजा और आज बनाकर के राम जी स्वयं पहाड़ पर निवास करने लगे।