बाराबंकी ।
संत संपूर्ण मानव जगत को राह दिखाते हैं। उन्हें किसी सीमा में नहीं बांधा जा सकता है। संत साहब ने राम नाम जप का प्रचार तब किया था जब समाज कुरीतियों में जकड़ा था। संत जगजीवन दास का जीवन सामाजिक एकता की मिसाल है। फतेहपुर के साईं पीजी कॉलेज में संत जगजीवन साहब के काव्य पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में सामने आए विचारों का यही सार था।
हिंदुस्तान एकेडमी प्रयागराज व साईं पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय साहित्यकारों ने भागीदारी निभायी शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ सदानंद शाही की अध्यक्षता में हुये कार्यक्रम में जनेस्मा डिग्री कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अनीता सिंह ने कहा कि संत श्री ने लैंगिक समानता पर जोर देते हुए कन्या भ्रूण हत्या को महापाप बताया।
इतिहासकार श्यामसुंदर दीक्षित ने कहा कि संत जगजीवन अपने विचारों से सदैव पूज्य रहेंगे। रामनगर डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ0 वीबी सिंह ने बताया कि इतिहासकार नेवल गजेटियर में कोटवा धाम का वर्णन मिलता है। बतौर मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वाईपी सिंह ने कहा कि संविधान निर्माण से पहले संतों की वाणी ही आचार संहिता हो जाया करती थी। भारत ऋषि व कृषि का देश है। प्रोफेसर सदानंद शाही ने कहा कि बनारस से बाबा जगजीवन दास की काव्य धारा व अध्यात्म सीखने आया हूं। भारत का इतिहास संतो महापुरुषों के योगदान से भरा है। किंतु इस परंपरा को आने वाली युवा पीढ़ी कितना संभाल पाएगी यह विचारणीय विषय है। द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल राय ने संत जगजीवन के जीवन दर्शन को विस्तार से रेखांकित किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वाई पी सिंह, कोटवा धाम के कमोलीधाम आश्रम के कमलेश दास,ने संत जगजीवन दास के जीवन व उनके उपदेशों पर चर्चा किया। डॉ छत्रसाल सिंह, श्यामसुंदर दीक्षित, ने भी विचार व्यक्त किए । संचालन डॉ0 कंचन गुप्ता ने किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ राजेश मल्ल ने अतिथियों का स्वागत किया। कॉलेज प्रबंधक विपिन राठौर ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानाचार्य डॉ आशुतोष राव, डॉ दिनेश शुक्ल, अंशुवेन्द्र जायसवाल, विजयलक्ष्मी, धमेन्द्री वर्मा, अखिलेश प्रताप सिंह, दीपक वर्मा, कृष्ण कुमार वर्मा, वीर प्रताप, शालिनी मिश्र, पूर्ति टंडन, निधि वर्मा, दिग्विजय सिंह, जितेंद्र सिंह, दुर्गेश सिंह समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।