सिरौलीगौसपुर ।अजय कुमार रावत
श्रीकोटवाधाम के कमोली धाम आश्रम पर
बाबा कमलेश दास जी ने जनमानस को उपदेशित करते हुए कहा कि,
इस संसार की संरचना किसी महान शक्ति द्वारा अवश्य हुई है ।वह साकार निराकार किसी भी स्वरूप में हो सकती है ।विश्व के सभी धर्मों में उसे अनेक नामों से पुकारा गया है उसे है अल्लाह अल्लाख अगम अगोचर अलख निरंजन अविनाशी कहा गया है ।वेदों का सार तक ओम ही है। उसे हम रामकृष्ण आदि अनेकों नाम से पुकार सकते हैं ।विश्व के धर्मानुसार उसे खुदा गार्ड आदि विभिन्न नामों से पुकारा जाता है।
श्री दास जी ने कहा कि,
नाम का प्रभाव चारों युग में रहा है,। संत तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा है कि
चारों जुग रहे हो नाम प्रभाव।।
अर्थात चारों युग में नाम का ही प्रभाव सर्व व्याप्त रहा है।
नाम की सत्य के बदौलत ब्रह्मा जी अखिल विश्व ब्रह्मांड की संरचना करते हैं। नाम के प्रभाव के बल पर ही शेषनाग संपूर्ण पृथ्वी का भार अपने फन पर उठाया रहते हैं ।नाम के प्रभाव के कारण ही नल नील पत्थरों पर राम शब्द लिख देते थे वह भी तैरने लगता था ।हनूमान जी नाम के बल समुद्र लांघ गये और राक्ष सो का विनास कर सोने की लंका जला दी। इस संसार मे जो भी कार्य हो रहै नाम के बल और उसके प्रभाव होते है।
संसार में जो कुछ है जिसे हम दोनों आंखों से देख रहै हैं। वह पूर्ण रुप से नश्वर है ।साथ कुछ भी नहीं जाना है।ये शरीर भी जलकर राख हो जाना है ।इसीलिए सभी संतो ने सदैव नाम की
महिमा उसके प्रभाव का ही गुणगान किया गया है ।
रामचरितमानस में संत तुलसीदास जी ने कहा है कि
नाम की को कर सके बडाई ।
राम ना सके नाम गुण गाई।
नाम बड़ा है राम से। ‌।
सतनाम संप्रदाय की आज प्रवर्तक संत जग जीवन दास साहब ने नाम की महिमा का वर्णन करते हुए शब्द सागर में समाज को उपदेशित करते हुए कहा है कि
नाम बिना काहु न निस्तारा।।
नाम सुमिर मन बावरे।
नाम बिना गे जनम गवाई।।
संत जगजीवन दास साहेब ने कहा है कि
नाम यथार्थ शब्द है।
सबसे कहा न जाए।।
अधिकारी जन हुय जे
तिन को देव लखाय।।
अंत में श्री दास जी ने कहा संसार की सभी वस्तुएं नश्वर है केवल नाम की कमाई ही साथ जाएगी जन्म और मृत्यु सत्य है इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं है !
मनुष्य को जब भी समय मिले ईश्वर भजन ध्यान अवश्य करना चाहिए। सतनाम ही मोक्ष पाने का सहज मार्गहै।