औरैया (दीपक कुमार पाण्डेय) फफूंँद रेलवे स्टेशन का नाम एक बार फिर दिबियापुर करने की मांग।

फफूंँद रेलवे स्टेशन का नाम एक बार फिर दिबियापुर करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसके लिए सोशल मीडिया पर समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है।स्थानीय लोगों के अनुसार देश के विभिन्न शहरों व कस्बों से आने वाले लोग दिबियापुर नाम से रेलवे स्टेशन पूछते हैं। बाहर के लोगों को रिजर्वेशन कराने में भी भ्रम रहता है। कई बार यात्री अगले स्टेशन पर उतर जाता है। इससे यात्रियों को परेशानी होती है। कई सुपरफास्ट ट्रेनों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों यात्री यहां से आवागमन करते हैं। इसको देखते हुए इसका नाम दिबियापुर करने की मांग सोशल मीडिया पर उठने लगी है। वर्ष 2015 में फफूंद रेलवे स्टेशन को दिबियापुर करने की मांग को लेकर अभियान शुरू हुआ था।इसके लिए दिबियापुर-एक पहल जरूरत की, संस्था ने रेलवे के तत्कालीन डीआरएम को ज्ञापन दिया था।पिछले दिनों दिबियापुर के प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी जिलाधिकारी, कृषि राज्य मंत्री व सांसद को ज्ञापन दे चुके हैं। बाबरपुर निवासी कुलदीप कलेशी भी इसके लिए रेलमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दे चुके हैं। इंजीनियर एवं लेखक रजनीश दीक्षित लगातार रेलमंत्री पीयूष गोयल एवं प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग कर ट्वीट कर रहे हैं। वही दूसरी तरफ राष्ट्रीय ब्राह्मण समाज के समाज सेवी डॉक्टर अभिनंदन त्रिपाठी ने बताया कि हम लोगों ने आंदोलन चलाया था जिसमें 26 जनवरी 2010 से लेकर 30 जनवरी तक भूख हड़ताल चलाया गया था इसके बाद रेलवे ने उस समय हमारी मांगे मान ली थी जिसमें खासतौर से चार ट्रेनों के नाम भी स्वीकृत किए गए थे और नाम बदलने की बात कही थी उस समय लगभग 600 करोड़ की आमदनी बताई गई थी लेकिन वर्तमान समय में अब यह बढ़कर 900 करोड़ के आसपास हो गई है। अभियान को आगे बढ़ाने के लिए फेसबुक पर दिबियापुर रेलवे स्टेशन हमारा स्वाभिमान नाम से ग्रुप बना। इसके साथ ही ट्विटर पर भी मांग उठी। लाइक और शेयर का क्रम जारी है।