तरनतारन
भारत-पाकिस्तान सरहद से थोड़ी दूर मौजूद कस्बा भिखीविंड में शौर्य चक्र विजेता कामरेड की सरेआम घर में दाखिल होकर सिर्फ 30 सैकेंड में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा हत्या कर दी जाती है। हत्यारे इस घटना को बड़े आराम से अंजाम देकर मोटरसाइकिल पर सवार हो जाते हैं। फिलहाल इस घटना के बाद कस्बे में काफी सहम भरा माहौल पाया जा रहा है। वहीं पुलिस हत्यारों की खोज के लिए साईबर सैल और टीमों की मदद के साथ विशेष जांच में जुट गई है। गौर हो कि पुलिस मृतक के बेटों के खिलाफ दर्ज अपराधक केसों को भी शक की निगाह से देखते हुए मामले की जांच कर रही है। पाकिस्तान से भेजी जाने वाली हथियारों की खेप और खालिस्तान की बढ़ रही गतिविधियों को देख बलविंदर सिंह अक्सर परेशान रहता था, क्योंकि उसकी सुरक्षा को कुछ समय पहले पुराने एस.एस.पी. की तरफ से वापस ले लिया गया था। इसके कारण बलविंदर सिंह अपने परिवार की जान को खतरे में समझता था। सुरक्षा को लेकर पंजाब पुलिस की तरफ से मांग पूरी न होने के कारण परिवार ने सभी शौर्य चक्र सरकार को वापस कर देने की पेशकश भी की थी।
मृतक बलविंदर सिंह के बेटे अर्शदीप सिंह के खिलाफ थाना सिटी पट्टी में हथियार एक्ट के अंतर्गत साल 2020 को मामला दर्ज है। इस दौरान पुलिस ने कुल 10 आरोपियों से 3 गाडिय़ों, 3 पिस्तौल 32 बोर, 1 देसी पिस्तौल, 1 रिवाल्वर और रौंद बरामद किए थे। इसी तरह दोनों बेटों अर्शदीप सिंह और गगनदीप सिंह के खिलाफ 21 फरवरी 2019 दौरान थाना गेट हकीमां में धारा 307 के अंतर्गत मामला दर्ज है। इसके अलावा थाना सदर अमृतसर में एक बेटे के खिलाफ हथियार एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें पुलिस ने एक पिस्तौल 9 एम.एम, 1 देसी पिस्तौल और कुछ रौंद भी बरामद किए थे।
कामरेड बलविंदर सिंह जिसने आतंकवाद के काले दिनों में साल 1986 से ही आतंकवाद का विरोध करना शुरू कर दिया था। इसके अंतर्गत कामरेड ने अपने घर पर पक्के मोर्चे तैयार कर रखे थे। इस द्वारा उसने आतंकवादियों के साथ समय तय कर करीब 18 मुकाबले किए थे। इन मुकाबलों दौरान पंजाब पुलिस की तरफ से कामरेड बलविंदर सिंह और भाई रणजीत सिंह के परिवारों को सुरक्षा जवानों सहित हथियार दिए गए थे। बलविंदर सिंह जिसने घर में ही प्राइवेट स्कूल चलाते हुए बच्चों को भी आतंकवाद विरोधी पाठ पढ़ाया था, जो अक्सर आतंकवादियों का नाम सुनते ही गुस्से से लाल हो जाता था। इस बहादुरी को देखते हुए कामरेड बलविंदर सिंह, पत्नी जगदीश कौर, भाई रणजीत सिंह और भाभी बलराज कौर को राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने 1993 दौरान शौर्य चक्र के साथ सम्मानित किया था।
मृतक की पत्नी जगदीश कौर, बेटे गगनदीप सिंह, अर्शदीप सिंह, बेटी प्रनप्रीत कौर ने पुलिस के खिलाफ आरोप लगाया कि एस.एस.पी. ध्रुव दहिया की तरफ से आतंकवाद के साथ मुकाबला करने वाले परिवार को जारी की गई सुरक्षा करीब एक साल पहले वापस ले ली गई। इस संबंधित उन्होंने कई बार उ‘च अधिकारियों से अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की, परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। परिवार ने पुलिस के खिलाफ रोष जाहिर करते हुए कहा कि अगर उनकी सुरक्षा वापस न ली जाती तो आज बलविंदर सिंह जिंदा होता। वहीं मृतक की बेटी और पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है।
सी.सी.टी.वी. कैमरों से यह साफ दिखाई देता है कि सुबह करीब 7.10 बजे एक मोटरसाइकिल पर सवार 2 व्यक्ति जिन्होंने काले रंग के ट्रैक सूट डाले हुए हैं की तरफ से घर का दरवाजा खटखटाया गया, जिसके बाद एक हत्यारा घर अंदर दाखिल हुआ और कामरेड बलविंदर सिंह को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग के चलते अपनी रिवाल्वर खाली कर बाहर पहले से ही तैयार खड़े साथी के साथ फरार हो गया। इस घटना को अंजाम देने में हत्यारों ने सिर्फ &0 सैकेंट का समय लिया। एस.एस.पी. ध्रुमन एच. निंबाले ने बताया कि सी.सी.टी.वी. कैमरों की फुटेज द्वारा हत्यारों की खोज शुरु कर दी गई है। जिसके लिए 4 विशेष जांच समितियों का गठन किया गया है।