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नारायण शुक्ला।

कानपुर। परम पूज्य आचार्य श्री श्यामेश मिश्र अध्यक्ष वैदिक लाइव न्यास ट्रस्ट कल्याणपुर के तत्वाधान में श्री तुलसी शालिग्राम विवाह महोत्सव की पूरी तैयारियां पूर्ण हो जाने के उपरांत श्रीरामचरितमानस संपूर्ण पाठ के साथ महोत्सव का शुभारंभ परम पूज्य आचार्य श्री श्यामेश जी महाराज के बड़े भाई श्री मिथिलेश कुमार मिश्र ,(शिक्षक) जिला अध्यक्ष,/मंडल अध्यक्ष उत्तर प्रदेश, सी•वे,•शि•संघ पूर्व (माध्यमिक) कानपुर मंडल के कर कमलों द्वारा किया गया

यह श्री तुलसी शालिग्राम विवाह महोत्सव 3 दिनों तक लगातार चलेगा विगत कई वर्षों से यह महोत्सव मनाया जा रहा है

आचार्य श्री श्यामेश जी महाराज ने तुलसी शालिगराम विवाह का महत्व को इस प्रकार बताया

तुलसी विवाह में करें इस पौराणिक कथा का पाठ, पूरी होगी सभी मनोकामना

तुलसी विवाह 15 नवंबर दिन सोमवार को किया जाएगा। इस दिन पूजन में तुलसी विवाह की पौराणिक कथा का पाठ ककरे तुलसी मंगलाष्टक का पाठ किया जाता है। ऐसा करने से घर भगवान शालीग्राम और तुलसी मां सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती है: तुलसी विवाह में करें इस पौराणिक कथा का पाठ, पूरी होगी सभी मनोकामना

कार्तिक माह की देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी जी और भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का विवाह करने से कन्यादान के तुल्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं तुलसी विवाह का आयोजन और पूजन करती हैं उन्हें अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस साल तुलसी विवाह 15 नवंबर, दिन सोमवार को किया जाएगा। इस दिन पूजन में तुलसी विवाह की पौराणिक कथा का पाठ ककरे, तुलसी मंगलाष्टक का पाठ किया जाता है। ऐसा करने से घर भगवान शालीग्राम और तुलसी मां सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं। आइए जानते हैं तुलसी जी की पौराणिक कथा के बारे में…..

तुलसी विवाह पौराणिक कथा

शिव पुराण की कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव के क्रोध से तेज का निर्माण हुआ। इस तेज के समुद्र में जाने से एक तेजस्वी दैत्य बालक ने जन्म लिया। जो आगे चलकर दैत्यराज जलंधर कहलाया और इसकी राजधानी जालंधर कहलायी। जालंधर का विवाह कालनेमी की पुत्री वृंदा से हुआ। वृंदा पतिव्रता स्त्री थी। जलंधर ने अपने पराक्रम से स्वर्ग को जीत लिया। लेकिन एक दिन वो अपनी शक्ति के मद में चूर हो कर माता पार्वती को पाने की लालसा से कैलाश पर्वत जा पहुंचा। इससे क्रुद्ध हो कर भगवान शंकर ने उसका वध करने का प्रयास किया। लेकिन भगवान शिव का ही पुत्र होने के कारण वो शिव के समान ही बलशाली था और उसके साथ वृंदा के पतिव्रत की शक्ति भी थी। जिस कारण भगवान शिव भी उसका वध नहीं कर पा रहे थे। तब पार्वती जी ने सार वृत्तांत विष्णु जी को सुनाया। जब तक वृंदा का पतिव्रत भंग नहीं होगा तब तक जलंधर को नहीं मारा जा सकता है।

भगवान विष्णु ऋषि का वेश धारण कर वन में जा पहुंचे, जहां वृंदा अकेली भ्रमण कर रही थीं। ऋषि को देखकर वृंदा ने महादेव के साथ युद्ध कर रहे अपने पति जालंधर के बारे में पूछा। तब ऋषि रूपी विष्णु जी ने अपनी माया से दो वानर प्रकट किए। एक वानर के हाथ में जालंधर का सिर था तथा दूसरे के हाथ में धड़। अपने पति की यह दशा देखकर वृंदा मूर्छित हो गई। होश में आने पर उसने ऋषि से अपने पति को जीवित करने की विनती की। भगवान विष्णु ने अपनी माया से पुन: जालंधर का सिर धड़ से जोड़ दिया और साथ ही स्वयं भी उसके शरीर में प्रवेश कर गए। वृंदा को इस छल का जरा भी आभास न हुआ। जालंधर बने भगवान विष्णु के साथ वृंदा पतिव्रता का व्यवहार करने लगी। जिससे उसका सतीत्व भंग हो गया और ऐसा होते ही वृंदा का पति जालंधर युद्ध में हार कर मारा गया।

: भगवान विष्णु की लीला का पता चलने पर वृंदा ने, भगवान विष्णु को ह्रदयहीन शिला होने का श्राप दे दिया। वृंदा के श्राप के प्रभाव से विष्णु जी शालिग्राम रूप में पत्थर बन गये। सृष्टि के पालनकर्ता के पत्थर बन जाने से सृष्टि में असंतुलन स्थापित हो गया। यह देखकर सभी देवी देवताओं ने वृंदा से प्रार्थना की वह भगवान विष्णु को श्राप मुक्त कर दे। वृंदा ने विष्णु जी को श्राप मुक्त कर स्वयं आत्मदाह कर लिया। जहां वृंदा भस्म हुईं, वहां तुलसी का पौधा उग आया। भगवान विष्णु ने कहा कि वृंदा, तुम अपने सतीत्व के कारण मुझे लक्ष्मी से भी अधिक प्रिय हो गई हो। तुम तुलसी के रूप में सदा मेरे साथ रहोगी। तब से हर साल कार्तिक महीने के देव-उठावनी एकादशी का दिन तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है।

श्री तुलसी शालिग्राम विवाह कार्यक्रम विवरण इस प्रकार है

१)-13 नवंबर,दिन-शनिवार,समय- प्रातः10:30 बजे – (पूजन एवं अखंड रामायण पाठ प्रारंभ)।

२)- 14 नवंबर,दिन-रविवार,समय-अपराह्न 12 बजे- उद्यापन एवं मातृपूजन ।

३)- 15 नवम्बर,दिन-सोमवार,समय-अपराह्न 1 बजे से -( रामराज्याभिषेक, तुलसी ठाकुर जी विवाह )

इस महोत्सव के आयोजक श्रीमती लक्ष्मी मिश्रा एवं श्रीमती मिथिलेश पांडे जी इस कार्यक्रम में चार चांद लगाने हेतु हमारे बीच पधारे डॉ राकेश मिश्रा आयुर्वेदाचार्य एवं पंडित लक्ष्मण मिश्रा पधार कर महोत्सव में चार चांद लगा दिए।

इस महोत्सव में व्यवस्थापक की मुख्य भूमिका निभाई है पंडित प्रशांत मिश्र पूर्व विभाग संगठन मंत्री श्री सुधाकर तिवारी श्री राजेंद्र प्रसाद दीक्षित श्री हरिशंकर मिश्रा श्री रमाकांत द्विवेदी प्रिया सृष्टि स्मृति सौम्या विधि आदि उपस्थित रहकर श्री तुलसी शालिग्राम विवाह महोत्सव की शोभा बढ़ाई एवं महोत्सव को सफल बनाया।