औरैया (दीपक पाण्डेय) मां कात्यायनी की आराधना से भक्तिरंग में सराबोर हुए श्रद्धालु।

ब्लाक भाग्यनागर के ककोर मार्ग पर स्थित गाँव जैतपुर में महामंगलकली देवी मंदिर में नवरात्र के छठवें दिन मंगलवार को भक्तों ने शक्ति स्वरूपा मां भवानी के कात्यायनी स्वरूप की आराधना की। मान्यता है कि अमोघ फल देने वाली मां कात्यायनी की उपासना ब्रजधाम की गोपियों ने भी भगवान श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए यमुना तट पर की थी।माता रानी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिरों में पहुंच रहे हैं। वहीं सुबह से लेकर रातभर मां दुर्गा के दरबार में भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती का पाठ कर पूरे परिवार की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। सप्तमी से नगर में दुर्गा पंडालों की संख्या में और इजाफा होगा। ग्रामीणांचल में भी पंडालों में सजीं माता रानी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। हर तरफ भक्ति गीतों की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रस से घुला रहा। लाइटों एवं झालरों से सजे पंडालों की शोभा देखती ही बन रही है। वही मंदिर के पुजारी ने बताया कि आज मां कालरात्रि की उपासना : मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से सुशोभित हैं। अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति हैं। इन देवी के तीन नेत्र हैं। यह तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं। कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम आसुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं। इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं।