औरैया (दीपक पाण्डेय) मा कालरात्रि मुक्ति दायनी है। आचार्य निर्मल पंडित।

 

 

 

दुर्गा जनजागरण सीमित द्वारा दुर्गा महोत्सव में माँ दुर्गा की कथा के सातवे दिन मंगलवार को कथा में आचार्य निर्मल पंडित ने भगवत चर्चा की। जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए सार वाक्य कहा कि नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। मां कालरात्रि निर्वाणरूपा मुक्तिदात्री हैं। साथ ही यह भी कहा कि सीता बनना अपेक्षाकृत सरल है लेकिन राधा बनना बहुत कठिन है। श्रीकृष्ण के अंतिम दिनों और उस समय की द्वारिकापुरी का वर्णन करते हुए वह भावुक हो गए और अश्रुपूरित नेत्रों से उद्धव और सुदामा की कथा सुनाई। शब्द की वृहद व्याख्या करते हुए कहा कि यह स्त्री और पुरूष दोनों के नाम के साथ समान रूप से लगाया जा सकता है।इसके साथ ही उन्होंने श्री शब्द के अनेक अर्थ की व्याख्या की। इसी क्रम में आदि गुरु शंकराचार्य की चर्चा करते हुए उनके वाक्य को उद्धृत किया कि मैं स्त्री व पुरूष में भेद नहीं मानता। दोनों ही ब्रह्म से ऊपर हैं। बापू ने कहा कि शंकराचार्य ने कहा था कि न मैं किसी का गुरु हो न ही किसी का चेला। बापू ने कहा कि विश्वगुरु होने के बाद भी यह कहना श्री की ही निशानी है। मां कालरात्रि की चर्चा करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने भी निशाचरों के लिए कालरात्रि का वर्णन किया है। बापू ने कहा कि वास्तव में कालरात्रि निशिचरों के लिए मुक्तिदात्री बनकर आई थी। उनको संसार से मुक्ति मिल गई। इस तरह से कालरात्रि उनके लिए निर्वाण रूपा बनकर आई थी।इस मौके पर दीपेश शुक्ला, सतीश शर्मा,गिरजा शंकर त्रिवेदी, मनीष यादव,राजू परिहार आदि भक्त मौजूद रहे।