परम पूज्य आचार्य श्री जी महाराज की कलम से

कानपुर निष्पक्ष जन अवलोकन नारायण शुक्ला

भाद्रपद मास यानी भादो के अंतिम मंगलवार को बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाने का प्रचलन है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन हनुमान ने इस दिन लंका को जलाकर विध्वंश किया।

हनुमान जब अशोक वाटिका उजाड़ने और रावण के एक पुत्र का वध करने के बाद रावण के सामने ले जाए गये तब रावण को धर्म के मार्ग में चलने का ज्ञान दिया लेकिन रावण अपने आराध्य शिव के अवतार को पहचान ही नहीं सका। हनुमान जी गुरु के रूप में उसको सही मार्ग दिखाने का प्रयास कर रहे थे और रावण अपने अहंकार में चूर उन्हीं की पूछ में आग लगाने का आदेश देता है।

भौतिकवादी युग में गुरु के प्रति आस्था खत्म होती जा रही है और सच्चा गुरु भी मिलना सरल नहीं रह गया है। नतीजन जीवन में अशांति, असुरक्षा और मानवीय गुणों का अभाव पैदा हो रहा है।

 

परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज ने बताया

 

तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की चौपाई का प्रारम्भ करते हुए स्पष्ट किया है कि ज्ञान और गुण के सागर हैं हनुमान। अगर चाहते तो वह ज्ञान और बल के सागर भी लिख सकते थे लेकिन तुलसीबाबा ने ज्ञान और गुणों के सागर लिखा। अंग्रेजी में समझें कि नॉलेज और क्वालिटी साथ में क्वांटिटी (सागर) है। हनुमान जी में ज्ञान और गुणों की अपार मात्रा है इसलिए उनकी ख्याति तीनों लोको में है। यहां हम लोगों के समझना है कि हमारे भीतर ज्ञान और गुणों को भरने वाला गुरु, शिक्षक है।

 

 

एक विशेष बात यह है कि तुलसीदासजी ने रामचरित मानस और हनुमान चालीसा के प्रारंभ में ही गुरु वंदना की है। उन्होंने कहा है कि अगर किसी का गुरु नहीं है तो वह हनुमान जी को अपना गुरु बना सकता है। ईश्वर का साक्षात्कार बिना गुरुकृपा के होना कठिन है। हनुमान जी के सामने पवित्र भाव रखते हुए उन्हें अपना गुरु बनाया जा सकता है। एकमात्र हनुमान जी ही है जिनकी कृपा हम गुरु की तरह प्राप्त कर सकते हैं। तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा का शुभारंभ ही गुरु के चरणों में नमन करते हुए किया है-

 

 

 

श्री गुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि

 

बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि

 

बुद्धि हीन तनु जानके, सुमिरौ पवन कुमार

 

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार

 

 

 

तुलसीबाबा ने हनुमान चालीसा में सभी को बजरंगबली को अपना गुरु बनाने को कहा है।

 

 

 

जय जय जय हनुमान गोसाईं

 

कृपा करहु गुरु देव की नाई…….

 

 

 

उन्होंने शिष्य को सचेत करते हुए कहा है कि हनुमान जी को गुरु को बनाने के बाद अनुशासनहीनता नहीं करनी चाहिए। अपनी मति और गति सही दिशा की ओर रखनी चाहिए। राम भक्त की कृपा पानी हो तो उन्हें नियम, भक्ति और समर्पण से ही प्रसन्न किया जा सकता है। हनुमान जी उन्हीं पर कृपा करते हैं जिनके विचार नेक होते हैं।

 

कैसे करें ग्रहों को शांत

आज किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर देसी घी की बूंदी चढ़ा कर दंडवत प्रणाम करें। अपने अहम, नेगेटिव विचारों और समस्याओं को हनुमान जी के चरणों में समर्पित कर रक्षा सूत्र बांध कर उनसे रक्षा करने का आशीर्वाद लेकर अपने घर लौट आएं।

 

आज अपने घर के ऊपर भगवा, केसरिया या सिंदूरी रंग की पताका जिस ओर उड़ते हुए बजरंगबली का चित्र बना हो। पूजन कर के लगाएं। ऐसा करने से हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होगा। यदि किसी हनुमान मंदिर में पताका लगाई जाए तो हर कष्ट का अंत तुरंत होगा।

 

हनुमान जी का बैठी मुद्रा में लाल रंग का चित्र अपने घर की दक्षिण दिशा में लगाएं। सकारात्मकता बनी रहेगी। घर के मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाने से कोई भी नकारात्मक शक्ति अपना प्रभाव नहीं दिखा पाएगी। घर में धन का प्रवाह बढ़ाने के लिए हनुमान जी का चित्र लगाएं, जिसमें वे भगवान राम की सेवा में लीन हो।

 

शीतल जल और गुड़ का दान करने से मंद पड़ा भाग्य प्रबल होता है। बर बिगड़ा काम बनने लगता है।

 

हनुमान जी को बेसन या बूंदी के लड्डू, इमरती अथवा मालपुआ चढ़ाकर गरीबों में बांटें। ऐसा करने से नवग्रहों के प्रभाव को शांत किया जा सकता है।