निष्पक्ष जन अवलोकन।
अजय रावत।
सिरौलीगौसपुर बाराबंकी। क्षेत्र के शौ शैय्या वाले संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर में डेंगू और वायरल बुखार के इलाज के सही इन्तजाम नही है।
शौ शैय्या वाले संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर मे डाक्टरों स्टाफ की कमी तथा डाक्टरों के यंहा न रुकने के कारण बीसों करोड़ रुपए की लागत से बनवाये गये इस संयुक्त चिकित्सालय से घाघरा की तलहटी के गरीब बीमारों को उचित स्वास्थ्य सुविधा व समय से डाक्टर न मिल पाने के कारण नही मिल पा रही है।जिसका मुख्य कारण संयुक्त चिकित्सालय की अधीक्षक से लेकर डाक्टर फार्मासिस्ट सभी लखनऊ बाराबंकी से अपडाउन करते हैं।जितना खूब सूरत अस्पताल डाक्टरों के आवास बने है ऐसे भवन जिला स्तर पर मयस्सर नहीं हैं। शहरों की भांति सिरौलीगौसपुर की विद्युत सप्लाई भी है।उसके बावजूद डाक्टर डेली अपडाउन कर रहे हैं।
यंहा पर ब्लड की जांच के लिये अच्छा सा लैब तो है किन्तु ब्लड बैंक नही है।जिसके चलते डेंगू बीमारी का सही से उपचार नही हो पाता है। विगत माह ग्राम किन्तूर के 32 वर्षीय गुडडू रावत नामक डेंगू के मरीज का सही से उपचार सिरौलीगौसपुर में न हो पाने के कारण प्रायवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया जंहा उसकी मृत्यु हो गई।परिवार के मुखिया गुडडू की मृत्यु के बाद तीन पुत्रियों के सर से बाप की छाया खत्म हो गयी।इतना ही नही कभी भी निरीक्षण कर लिया जाय तो पांच बजे के बाद अस्पताल की मुखिया से लेकर डाक्टर मुख्यालय पर नहीं मिलेंगे।पूर्व मे इस अस्पताल के अधीक्षक रहे डाक्टर जेटा सिंह के कार्यकाल में इस संयुक्त चिकित्सालय की ब्यवस्था इतनी गडबड नहीं थी जितनी इन दिनों है।
शासन ने इस संयुक्त चिकित्सालय को अच्छे से संचालित करने हेतु विगत माह डाक्टर नीलम गुप्ता को शौ शैय्या वाले संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर के अधीक्षक के रुप में तैनात किया वह स्वंय डेली लखनऊ से अपडाउन करतीं हैं।एक माह में एक भी दिन न तो यंहा रुकी हैं और न ही ओपीडी में मरीजों को देखा।इस अस्पताल डाक्टर आर बी राम महिला डाक्टर मीनाक्षी सक्सेना डाक्टर नेम श्री डाक्टर दीपिका डाक्टर ए के सिन्हा डाक्टर ए के पान्डेय डेंटल डाक्टर देवेन्द्र सिंह तथा आंख के ओपीडी में मरीजों के स्वास्थ्य का परीक्षण व दवाइंया लिखते रहे।वायरल बुखार के लिए पैरासिटामोल व अन्य दवाओं की उपलब्धता तो है किन्तु तेज वायरल बुखार में दवाओं का असर कम होता है। अस्पताल में आई ड्राप महीनों से नही है नाक कान गला के डाक्टर का यंहा से महीनों पहले स्थानांतरण हो गया है। नाक कान गला से सम्बंधित मरीजों को झोला छाप डाक्टर या जिला मुख्यालय पर जाना पड रहा है। जिला अधिकारी का आदेश भी यंहा मायने नही रखता विगत माह अस्पताल में बनवाए जा रहे आक्सीजन प्लान्ट को जिलाधिकारी डाक्टर आदर्श सिंह 15अगस्त से पूर्व चालू कर देने की बात कही थी।आज तक आक्सीजन प्लान्ट चालू नहीं हो पाया है।