औरैया (दीपक पाण्डेय) धनुष भंग लीला को देखने के लिए भोर तक जमे रहे श्रोता।

 

 

 

जन्माण्टमी पर्व पर नगर के मुहल्ला तिवारियान स्थित दया लक्ष्मी मन्दिर पर धनुष भंग लीला का मंचन किया गया।जिसमें भगवान राम की लीला का राम लीला के पात्र कलाकारों ने भगवान राम के चरित्र का वर्णन किया।धनुष भंग लीला देखने के लिए श्रोतागण भोर तक डटे रहे और लीला का लुफ्त उठाते रहे।

 

नगर के दया लक्ष्मी मन्दिर पर मर्यादा पुरुसोत्म भगवान राम क़ी लीलाओं का मंचन किया गया।धनुष यंग की लीला में राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर का आयोजन रखा गया जिसमें दूर-दराज के राजाओ को आमंत्रित किया गया। राजाओं ने धनुष तोड़ने का काफी प्रयास किया मगर निराश होकर अपने आसन पर बैठ गए मुनि विश्वामित्र ने भगवान राम को धनुष तोड़ने का आदेश दिया गुरु की आज्ञा पाते ही भगवान राम ने धनुष को दो भागों में विभक्त कर दिया धनुष टूटते ही जय श्री राम के नारों से पंडाल गूंज उठा। भगवान राम के धनुष तोड़ते ही सीता जी अपनी सखियों के साथ वरमाला लेकर भगवान राम के पास पहुँची उन्होने जैसे ही भगवान राम को वरमाला पहनाई पंन्डाल जय श्री राम के जयकारे से गूंज उठा। तपस्या में लीन परशुराम ने धनुष टूटने की आवाज सुनकर जनकपुरी आ धमके और धनुष तोड़ने वाले की तलाश करने लगे महार्षि परशुराम को क्रोध में देखकर उपस्थित जनता भयभीत हो उठी। इसी बीच लक्ष्मण और परशुराम के बीच धनुष को लेकर छिड़ा संवाद भोर तक चलता रहा। जब कि नगर में बारिश होने के वावजूद श्रोतागणों में काफी उत्साह दिखाई दिया।

क़ार्यक्रम आयोजन

दया शंकर अवस्थी व उनकी धर्मपत्नी श्री मती लक्ष्मी अवस्थी ने आये हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।