कानपुर निष्पक्ष जन अवलोकन नारायण शुक्ला

 

जीएसटी के कड़े प्रावधानों के बाद भी कानपुर में बड़े पैमाने पर कर चोरी का खेल जारी है। सुपाड़ी, पान मसाला, स्क्रेप, किराना आइटम से जुड़े उत्पादों में सबसे ज्यादा खेल हो रहा है। सचल दल इकाइयां आंखों में चढ़ावे की पट्टी बांधकर बैठी हैं। उत्पादों से जुड़े ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों की विभाग में खुफिया डायरी हैं।

 

इसमें उत्पादों से लेकर बाकायदा उनका नाम तक दर्ज हैं, लेकिन चढ़ावे के लालच में मजाल है कि कोई अधिकारी कार्रवाई करने की जहमत उठा ले। जब कभी कार्रवाई होती भी है तो लखनऊ मुख्यालय से सूचना मिलने के बाद। कानपुर नगर, देहात और उन्नाव में सचल दल की 14 अलग-अलग इकाइयां हैं।

: रहे ट्रकों की सूचना और कार्रवाई लखनऊ मुख्यालय या एसआईबी के जरिये ही हो रही है। छोटी-छोटी चूक पर माल लदे वाहनों को विभाग में खड़ा करवा लिया जाता है लेकिन कर चोरी करके लाया जा रहा माल नजरअंदाज कर दिया जाता है।

 

 

केस एक

22 फरवरी को कालका एक्सप्रेस से कर चोरी करके लाए जा रहे माल की जानकारी जीएसटी मुख्यालय लखनऊ से एसआईबी के अफसरों को दी गई। इसके बाद टीमों ने ट्रेन की एक बोगी से बड़े पैमाने पर होजरी, रेडीमेड कपड़ों के अलावा कंप्यूटर पार्ट्स पकड़े थे।

 

केस दो

दो मार्च को जीएसटी लखनऊ मुख्यालय की सूचना पर एसआईबी लखनऊ और कानपुर की टीमों ने उन्नाव में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में जय मां मेटल में छापा मारकर एक साथ 22 ट्रक पकड़े थे। इनमें स्क्रेप कर चोरी करके लाया गया था।

: पूल वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं, हर दिन बदल जाते हैं कोड

हर दिन 15 हजार से ज्यादा ट्रकों का शहर में आवागमन है। सचल दल वाले शहर के कुछ खास ट्रांसपोर्टरों पर मेहरबान रहते हैं। इन ट्रकों में पान-मसाला, सुपाड़ी, किराना, रेडीमेड, आटो-पार्ट्स, परचून, कॉपर स्क्रेप आता जाता है। पान मसाला के बड़े-बड़े ब्रांडों की सप्लाई इनके माध्यम से होती है। इनके लिए बाकायदा ट्रांसपोर्टरों का पूल बना है। पी वन, पी टू, पी थ्री जैसे कोड का इस्तेमाल किया जाता है। ये कोड एक या दो दिन में बदल जाते हैं। इस कोड की जानकारी ट्रक चालक या उसके साथी को होती है। यह कोड शहर के अलग-अलग हिस्सों में निगरानी करने वाली टीमों के अफसरों को भी दे दिया जाता है। ट्रकों की चेकिंग के दौरान कोड बताते ही माल निकल जाता है।