×कानपुर निष्पक्ष जन अवलोकन नारायण शुक्ला

परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज के कल्याणकारी विचार

कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सबसे उत्तम माना गया है. कृष्ण भक्त इस दिन का बहुत ही बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस दिन भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों को सजाया जाता है और व्रत रखकर उनकी आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

 

परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज ने कहा

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ था. इस साल यह श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 30 अगस्त दिन सोमवार को पड़ रहा है.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा है यह दुर्लभ संयोग
यह बात परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज ने बताई

ज्योतिष शास्त्र की गणनाओं के अनुसार, इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर 6 तत्वों के विशेष संयोग का निर्माण हो रहा है. जो बहुत ही दुर्लभ माना जा रहा है. इस बार जन्माष्टमी पर भाद्र कृष्ण पक्ष, रोहिणी नक्षत्र, अर्धरात्रि कालीन अष्टमी तिथि, वृष राशि में चंद्रमा और सोमवार का होना बेहद अद्भुत संयोग बन रहा है. कृष्ण भक्त इस बात का ध्यान रखें कि अष्टमी तिथि रात्रि में 1 बजकर 59 मिनट तक ही रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी.
परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज ने कहा

दुर्लभ संयोग में पूजा के फायदे

इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहे दुर्लभ संयोग में व्रत रखने व पूजा करने का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि इस अद्भुत संयोग में कृष्ण भगवान की विधि विधान से पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है, तथा भक्तों को भगवत कृपा प्राप्त होती है. कहा जाता है कि जो लोग कई जन्मों से प्रेत योनि में भटक रहें हैं. इस दुर्लभ संयोग में उनके लिए पूजा करने से उन्हें मुक्ति मिल जाती है. इस संयोग में वासुदेव कृष्ण के पूजन से सिद्धि प्राप्त होती है और हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति भी मिल जाती है.