कानपुर निष्पक्ष जन अवलोकन नारायण शुक्ला

आज हम भाई बहन के पवित्र रिश्‍ते को समर्पित त्‍यौहार रक्षाबंधन को मनाने जा रहे हैं। यह परंपरा सदियों पूर्व से चली आ रही है। इस त्‍यौहार में प्रमुखतः बहनें अपने भाई के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके कुशल भविष्‍य की कामना करती हैं। किंतु इस रक्षा सूत्र को कई पुरूष भी भाई-चारे के नाते एक दूसरे की कलाई पर बांधते हैं।

परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज के श्री  मुख से ऐसा कहा गया

पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से वृक्षों पर भी रक्षा सूत्र बांधे जाते हैं। रक्षा बंधन कब से प्रारंभ हुआ इसका प्रत्‍यक्ष इतिहास कहीं भी मौजूद नहीं है। भविष्‍य पुराण के अनुसार जब देव और दानवों का युद्ध अपने चरम पर पहुंच गया तथा देवताओं की हार लगभग निश्चित हो गयी, तब इन्‍द्र विचलित होकर बृहस्पति के पास गए। गुरु बृहस्पति ने इन्‍द्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन कलाई पर एक पवित्र धागा बांधने की सलाह दी। इसे इन्द्राणी (इन्‍द्र की पत्‍नी) द्वारा बनाया गया था। इस पवित्र धागे की अद्वीतीय शक्ति से इन्‍द्र युद्ध में विजयी हुए तथा इस श्रावण पूर्णिमा से रक्षा बंधन की शुरूआत हुयी। यह धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय का प्रतीक माना जाता है।

परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज ने कहा

भविष्‍य पुराण के उत्‍तर पर्व के अध्‍याय 137 में भगवान श्री कृष्‍ण ने युद्ध‍िष्ठिर को पूर्णिमा के दिन दाहिनी कलाई में रक्षा सूत्र को बांधने की रस्‍म के विषय में बताया है। जिसके अंतर्गत श्रावण मास में हुए पर्यावरणीय परिवर्तनों का उल्‍लेख करते हुए श्री कृष्‍ण कहते हैं कि श्रावण माह में आने वाली पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों और ऋषियों को स्‍नान कर अपनी क्षमता अनुसार वेदों के अनुरूप देवताओं और पितरों को दान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शूद्रों को भी मंत्रोच्‍चारण के साथ स्‍नान करना चाहिए तथा दान करना चाहिए। इस दिन दोपहर (तीन बजे से पूर्व) में एक नए सूती या रेशम के कपड़े में चावल या जौं, सरसों के बीज और लाल गेरू को रखकर एक छोटी सी पोटली या रक्षा सूत्र तैयार करना चाहिए। पुरोहित को इस रक्षा सूत्र को रक्षा की कामना के साथ राजा की कलाई में बांधना चाहिए। राजा की ही तरह ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों और शूद्रों को भी प्रार्थना करने के बाद उनके रक्षा बंधन समारोह का समापन करना चाहिए। स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबन्धन का प्रसंग मिलता है।महाभारत की कथा से हर कोई परिचित हैं। इसमें भी रक्षा सूत्र की पवित्रता का विशेष उल्‍लेख किया गया है। एक युद्ध के दौरान जब भगवान श्री कृष्‍ण की उंगली कट गयी, तो द्रौपदी ने श्री कृष्‍ण के हाथ में अपने वस्‍त्र का एक टुकड़ा बांधा, जिसके बदले में भगवान श्री कृष्‍ण ने संकट में उनकी रक्षा करने का वचन दिया। वामनावतार में भगवान विष्‍णु ने तीन पग में तीनों लोक नापकर राजा बलि का अहंकार समाप्‍त किया तथा उन्‍हें रसातल में भेज दिया। राजा बलि ने अपनी अटूट शक्ति से भगवान श्री विष्‍णु को दिन के चारों पहर अपने साथ रहने के लिए विवश कर दिया। जिस कारण माता लक्ष्‍मी परेशान हो गयीं, नारद की सलाह पर उन्‍होंने बालि के हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर उन्‍हें अपना भाई बना दिया तथा विष्‍णु जी को वापस अपने साथ ले गयीं। आज भी रक्षाबंधन के इस त्यौहार की पवित्रता का महत्‍व यथावत बना हुआ है।

परम पूज्य आचार्य श्री सतीश जी महाराज ने बताया

राशिनुसार बांधे रक्षासूत्र

इस पावन पर्व पर बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र को बांधती हैं और उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। वहीं स्वास्थ्य की दृष्टि से भी रक्षासूत्र काफी फायदेमंद होता है। राखी बांधने से कफ, पित्त और वात जैसी कई बीमारियां दूर हो सकती हैं और अंतर्मन में भय नहीं सताता है। इतना ही नहीं भाई की सुख-समृद्धि के लिए आप ज्योतिष की मानें तो उनकी राशि के अनुसार आप उन्हें शुभ रंग की राखी बांध सकती हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि भाई की राशि के अनुसार बहनें उन्हें कौन-से रंग का रक्षासूत्र बांधे।

मेष राशि

इस राशि का स्वामी मंगल है। इस राशि के जातक की कलाई पर लाल रंग की राखी बांध सकते हैं और उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगा सकते हैं। मालपुए से उनका मुंहमीठा करा सकते हैं। इससे उन्हें नये कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बनी रहेगी.

 

वृष राशि

इस राशि का स्वामी शुक्र है। जिनके भाइयों की राशि वृषभ है उन बहनों को कलाई पर सफेद रेशमी डोरी वाली राखी बांधनी चाहिए और रोली का तिलक करना चाहिए। मुंहमीठा कराने के लिए उन्हें दूध से निर्मित मिठाई खिलाएं। इससे उन्हें मानसिक शांति मिल सकती है।

 

मिथुन राशि

इस राशि के जातकों की कलाई पर हरे रंग की राखी बांध सकते हैं और हल्दी का तिलक लगा सकते हैं। इस राशि का स्वामी बुध है। इससे भाई को दीर्घायु प्राप्त हो सकती है और सुख-समृद्धि बनी रहने की संभावना है। भाई को बेसन से निर्मित मिठाई खिलाएं।

 

कर्क राशि

इस राशि का स्वामी चंद्रमा है जिसकी वजह से भाई की कलाई में चमकीले सफेद रंग की राखी बांधे और माथे पर चंदन का तिलक लगाएं। मिठाई के रूप में रबड़ी खिलाएं। इस रंग से भावनात्मक रिश्तों में मजबूती बनी रह सकती है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों का स्वामी सूर्य है और सूर्य का रंग पीला होता है। इस वजह से आप अपने भाई की कलाई में गोल्डन पीले रंग की राखी बांध सकती हैं और हल्दी मिश्रित रोली का तिलक भी लगा सकती हैं। इससे उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहने की संभावना है।

 

कन्या राशि

अगर आपके भाई की राशि कन्या है, तो आप उन्हे गणेश जी के प्रतीक वाला रक्षासूत्र बांधे और उन्हें गणेश जी की प्रिय मिठाई मोतीचूर का लड्डू खिलाएं। बता दें कि इस राशि के जातकों का स्वामी बुध है, जिसकी वजह से भाई-बहन के बीच हमेशा प्रेमभाव बने रहने की संभावना है।

 

तुला राशि

इस राशि के जातकों का स्वामी शुक्र है। भाई को अपनी बहन से नीले रंग की राखी बंधवानी चाहिए और भाई को हलवा बनाकर खिलाएं। यह उनकी निर्णायक क्षमता को बढ़ा सकती है और नकारात्मक विचारों से रक्षा करेगी।

 

वृश्चिक राशि

अगर आपके भाई की राशि वृश्चिक है, तो आप लाल रंग की राखी बांध सकती हैं। मोती युक्त राखी बांधने से भाई के जीवन में खुशहाली बनी रह सकती है। अपने भाई को रोली का तिलक लगाएं, गुड़ से बनी मिठाई खिलाएं।

 

धनु राशि

धनु राशि के जातकों की कलाई पर पीले या सुनहरे रंग की या चंदन की राखी बांध सकते हैं और हल्दी या कुमकुम का तिलक लगा सकते हैं। मिठाई के रूप में रसगुल्ला खिलाएं। ऐसा करने से मानसिक शांति बनी रहने की संभावना है। इस राशि का स्वामी बृहस्पति है।

मकर राशि

यदि आपके भाई की राशि मकर है, तो उन्हें नीले रंग की राखी बांधे, गहरे रंग का रक्षासूत्र इस राशि के लोगों की अशुभता से रक्षा कर सकता है। केसर का तिलक लगाएं और भाई को बालूशाही खिलाएं।

 

कुम्भ राशि

इस राशि का स्वामी शनि है। इस राशि के लोगों को रुद्राक्ष से निर्मित राखी बांधनी चाहिए। इस राशि के जातकों को हल्दी का तिलक करें और कलाकंद खिलाएं। यह उन्हें अच्छा व्यक्तित्व और मजबूत मनोबल प्रदान कर सकता है।

मीन राशि

यदि आपके भाई की राशि मीन है, तो उन्हें सुनहरे पीले रंग की राखी बांधे और हल्दी का तिलक लगाएं। इसके अलावा उन्हें मिल्क केक खिलाएं। यह उनके मन को प्रसन्नचित्त रख सकता है।