सिरौलीगौसपुर बाराबंकी ।सत्यनाम क्या है
सतनाम संप्रदाय के साधु संतों महंतों ने सतनाम क्या है?इस विषय पर अपनी जिज्ञासा जाहिर की है।
यह बात श्रीकोटवाधाम बडी गददी के महन्त नीलेन्द्र बक्श दास नीरज भइया ने कही ।उन्होने कहा कि यह अध्यात्मिक जगत का अत्यंत गूढ रहस्य का विषय है
अखिल विश्व ब्रह्मांगावा।
उत्पत्ति नाम और शब्द से हुई है। संसार में जितनी भी चर अचर वस्तुएं हैं। उनका कोई ना कोई नाम अवश्य है। बिना नाम की कोई वस्तु हो ही नहीं सकती!? इसअखिल विश्व ब्रह्मांड की उत्पत्ति सृष्टि कर्ता है का कोई न कोई नाम अवश्य है!जिसे विश्व के विभिन्न धर्मो संप्रदायों वा पंथो ने अल्लाह, अलख, ईश्वर, खुदा, गार्ड ,शिव, कृष्ण, राम ,सत्पुरुषआदि विभिन्न नामों से पुकारा गया है। सृष्टि कर्ता सत्पुरुष का नाम होते हुए भी, वह अनामी है। किंतु संसार के जितने भी नाम हैं ,सब उसी के नाम हैं!
राम नाम सत्य, निराकार, अलख, निरंजन, ऊं,हंस, सोहं,अगम,अगोचर, अविनाशी है ।वह संसार के जर्रे जर्रे चर अचर सभी प्राणियों के अंतर घट में स्वांसो के रूप में रमा हुए होने के कारण राम कहा गया है। राम ही अखिल विश्व ब्रह्मांड के रचयिता महानायक सत्पुरुष है!औरवह ही सत्यनाम है।
इस बात की प्रामाणिकता जब होती है। जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय कोई भी व्यक्ति सोहम नाम सत्य है! ऊं नाम सत्य है !कृष्ण नाम सत्य है !अल्लाह नाम सत्य है! गार्ड नाम सत्य है !कोई नहीं कहता ?
सभी लोग

राम नाम सत्य है सब की यही गाति ही कहते है ! इससे सिद्ध होता है कि राम नाम ही शिष्ट कर्ता सत्पुरुष निर्गुण निराकार अलख निरंजन अगम अगोचर अविनाशी और सत्यनाम है।
इस सत्य रहस्य को अखिल विश्व ब्रम्हांड के महान नायकश्री जगन्नाथ स्वामी जी के अवतार सत समर्थ जगजीवन साहब ने सतनाम क्या है ?
राम नाम क्या है ?समाज को उपदेशित करते कहा है।

राधावर सोई सियावर।सोई सब घट राम।।
जगजीवन दास दुइ अच्छरा।
सोई है सत्यनाम।।
अर्थात जो परम सत्ता स्वांसों के रूप में श्री कृष्ण के अंतर्गत में व्याप्त थी !वही परम सत्ता राम के अंतर घट में स्वांसों के रूप में व्याप्त थी ।जो स्वांसों के रूप में सभी केअंतर घट मे रमे होने के नाते राम कहा गया है !और वही दो अच्छर रकार मकार सतनाम है।
समर्थ साईं जगजीवन साहब ने राम और कृष्ण में भेद नहीं माना ।किंतु राम को ही सर्वोपरि माना। राम की सर्बब्यापक परम सत्ता को स्वीकार करते हुए समाज को उपदेशित करते हुए कहा कि,
साधो दुइअच्छर तत्सार।
समर्थ सांईजगजीवन दास ने राम नाम को ही मूल मंत्र माना !और समाज को उदेशित करते हुए कहा कि,
मूलमंत्र यही है मन मा सुमिरो राम।।
शब्द सागर ग्रंथ में समाज को उपदेशित समर्थ सांई जगजीवन साहब ने राम नाम की महिमा को समाज को उपदेशित करते हुए कहा है कि,
और कुछ मंत्र राम सम नाही।
राम नाम ही सत्यनाम है।।
राम नाम के रहस्य को कुछ शब्दों पन्नो तथा कुछ पोथीयों में लिख पाना संभव नहीं है! राम नाम के रहस्य को पढ़ लिख कर भी जान पाना संभव नहीं है !राम नाम के रहस्य को राम नाम के सुमिरन भजन ध्यान से ही जाना जा सकता है।
राम नाम रहस्य को समर्थ साईं जगजीवन साहब ने समाज को उपदेशित करते हुए शब्द सागर मे कहा है कि,
साधो भेद ना काहू पावा।
जेहिका जस जान परत है,सो तेहि सै गावा ।