निष्पक्ष जन अवलोकन।
अजय रावत।
सिरौलीगौसपुर बाराबंकी। आजादी की कोई खबर नहीं थी।लोग इत्मिनान में थे किसी को कानो कान जानकारी नहीं थी ब्रिटिश हुकूमत करने वाले रातो रात विल्डिंग खाली करके भाग गये। तब लोग आजादी का जश्न मनाने लगे ।
जब देश आजाद हुआ उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल नही थे।हकीम बैद्य से उपचार कराकर जीवन रक्षक औषधि लेते थे।
सड़कें न के बराबर कुछ कंकरीट सड़कें थीं। ट्रांसपोर्ट का आलम यह था ट्रेन से लोग सामान लाकर बैल गाडी से ट्रांसपोर्टिंग होती थी।
शहरों में भी बिजली की ब्यवस्था नहीं थी खम्भो पर सीसे की लालटेन उसमें मिटटी के तेल की ढिबरी रखकर उजाला किया जाता था।
जानकारी के लिए न्यूजपेपर कानपुर से प्रकाशित सियासत और बंगलोर के नशेमन अखबार उस वक्त शवाब पर थे। उसी से आवाम को जानकारी हांसिल होती थी।
प्रधानमंत्री मंत्री सांसद विधायक सभी ट्रेन बसों में सफर करते थे।
क्षेत्रों में नेता सायकिल से आते जाते थे।
विजली और सिंचाई के संसाधन कम थे रहट से सिंचाई लहडरा बाजडा मेडुवा काकून जोन्धरी मकाई कोदौ चना अरहर आदि फसलें पैदा होती थी उसी से ग्रामीण क्षेत्र के लोग जीवन यापन करते थे ।
अब्दुल मुजीब ने कहा कि जिले में ब्रिटिश अधिकारी ही नियुक्त होते थे।अपने पिता अब्दुल वहाब के साथ आते जाते तिलंगा को बहुत डरते थे।
जब देश आजाद हो गया कुछ दिनों बाद हम लोग आजादी महसूस करने लगे । और जब मुल्क में अपनी सरकार बनी धीरे धीरे देश को विकास की तरफ ले जाने के लिए सिंचाई के संसाधन विजली सडक पुल ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों के साथ साथ बसों के को चलाया गया ।संशाधन बढते बढ़ते देश तरक्की करने लगा आवाम को तमाम सहूलतें मिलनें लगी और आज आवाम अपने पैरों पर खडी नजर आ रही है।