औरैया (दीपक कुमार पाण्डेय)

कंचौसी क्षेत्र में अनाज के आयात-निर्यात की समस्या को ध्यान में रखकर शायद अंग्रेजों ने लगभग 100 वर्ष पूर्व कंचौसी रेलवे स्टेशन की स्थापना कराई थी लेकिन 100 वर्ष गुजरने के बाद भी यहां सुविधाओं का टोटा है। बल्कि यूं कह सकते हैं कि हालत बद से बदतर हो गए हैं। यात्री पानी तक के लिए तरस जाते हैं। एक प्लेटफार्म से दूसरे-प्लेटफार्म जाने में भी लोगों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। इस स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव तक नहीं है। कस्बावासियों की शिकायत को भी रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी नजरअंदाज कर देते हैं।कंचौसी कस्बे में स्थित रेलवे स्टेशन व्यावसायिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। अनाज आयात निर्यात में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला यह क्षेत्र कभी रेलवे के माध्यम से लाखों रुपये की अनाज निर्यात करता था लेकिन इस स्टेशन के विकास के लिए कभी कोई प्रयास नहीं हुआ। वर्ष 2019 में अकबरपुर सांसद देवेन्द्र सिंह भोले के प्रयास से ऊंचाहार एक्सप्रेस ट्रेन चलनी शुरू हो गई। लेकिन कोरोना काल मे लगे लोक डाउन के बाद एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव निरस्त कर दिया गया। क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग की लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी।कस्बावासी अभय गुप्ता का कहना है कि स्थानीय स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होना चाहिए। यदि हमारी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। मोनू चौहान का कहना है कि स्टेशन व्यवस्थित बनने के साथ ही सुविधाएं मिल जातीं तो क्षेत्र की जनता को काफी सहूलियत मिल जाती लेकिन हुआ कुछ नही । अनूप पोरवाल का कहना है कि ब्रिटिश हुकूमत में निर्मित इस स्टेशन के विकास के लिए आज तक कुछ नहीं हुआ। एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव हो जाता तो व्यापार के नजरिए से काफी लाभ मिलता। शैलेश अवस्थी का कहना है कि सुविधाएं मिल जातीं तो कस्बावासी ही नहीं आस-पास के क्षेत्रवासी भी लाभान्वित होते।