◆अप्रतिम योद्धा शहीद खुदीराम बोस की पुण्यतिथि किया याद

निष्पक्ष जन अवलोकन।
नितेश मिश्रा।
बाराबंकी। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में क्रांतिकारी आंदोलन के अप्रतिम योगदान के बावजूद हमारी आज की नई पीढ़ी उससे अपरिचित है। इसका एक बड़ा कारण उनका सामाजिकता से दूर होना है। इस अभाव का परिणाम यह हुआ है कि सामान्य युवा सिंर्फ यह जानते हैं कि इस आंदोलन ने देश को सरदार भगत सिंह जैसा शहीद-ए-आजम दिया, लेकिन उसके पहले और सबसे कम उम्र के शहीद के बारे में कुछ नहीं जानते। खुदीराम बोस जिन्होंने इस आन्दोलन को अपने खून से सींचा। जो चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह सरीखे क्रान्तिकारियों के प्रेरणास्त्रोत रहे। उन्हें भूला दिया गया। इस नई पीढी को खुदीराम बोस जैसे अप्रतिम योद्धा के संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

यह बात अगस्त क्रान्ति सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार को स्वतंत्रता सेनानी शहीद खुदीराम बोस की 108वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता कर रहे गांधीवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कही। इस दौरान उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। समाजसेवी विजय कुमार सिंह ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में नौजवानों की शहादत ने स्वतंत्रता संग्राम का रुख बदलकर रख दिया था। खुदीराम बोस उनमें से एक थे, जिन्होंने 11 अगस्त 1908 को मातृभूमि की रक्षा के लिए अल्प आयु में ही अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। खुदीराम बोस की यह शहादत लंबे वक्त तक क्रांतिकारी युवकों की प्रेरणा बनी रही।
सभा का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। इस अवसर पर हाजी सलाउद्दीन किदवई, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, समाजसेवी अशोक शुक्ला, साकेत मौर्या, सरदार राजा सिंह एडवोकेट, मनीष यादव, परवेज अख्तर, शिवा शर्मा, अनिल यादव, मनीष खेतान, लवकुश शरण आनन्द, शिवा शर्मा, मनीष सिंह, राहुल यादव, मनीष खेतान, राममनोहर, तौफीक अहमद, मो. अदीब इकबाल, पी.के सिंह, अशोक जायसवाल, कपिल यादव सहित कई लोग मौजूद रहे।