निष्पक्ष जन अवलोकन। योगेश जायसवाल। बाराबंकी। डा0रामबाबू हरित अध्यक्ष, रामनरेश पासवान उपाध्यक्ष व श्रीमती अनीता सिद्धार्थ सदस्या व रमेश तूफानी सदस्य उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग ने सर्वप्रथम सर्किट हाउस में पहुॅचकर अधिकारियों के साथ बैठकर बैठक की तथा जिले में चल रही गतिविधियों पर विशेष चर्चा की।
कलेक्ट्रेट स्थित लोक सभागार में पुलिस अधीक्षक को निर्देशित करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन का व्यवहार लोगों के साथ मित्रवत रहे, जिससे लोगों में जो पुलिस का भय है वह खत्म किया जा सके। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के मामलों को तत्परता से निस्तारित कराया जाये। किसी भी प्रकार की प्रकरणों के निस्तारण में लापरवाही न बरती जाये। उन्होंने समाज कल्याण अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में पात्रता का विशेष ध्यान रखा जाये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना एक कल्याणकारी योजना है। इसके माध्यम से बालविवाह पर रोक लग पायी है। साथ ही जिन पुत्रियों के पिता आर्थिक तंगी से ग्रसित थे, यह योजना उनके लिए वरदान साबित हुई है। मुख्य चिकित्साधिकारी से जनपद में लग रहे ऑक्सीजन प्लांट , पीकू वार्ड, वैक्सीनेशन, टेस्टिंग के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए उद्योग लगवाने के लिए मानक के अनुरूप लोन भी उपलब्ध कराये जाये। डा0रामबाबू हरित की अध्यक्षता में बैठक आहूत की गयी। बैठक के दौरान उन्होंने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों को सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का लाभ मिल रहा है, उन्होंने सम्बन्धित अधिकारी से इस सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग, लखनऊ का मुख्य कार्य राज्य में रहने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों द्वारा प्राप्त शिकायतों की निगरानी/सुनवाई करना तथा उनका विधिवत समाधान करना है। आयोग के सामने आने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के मामले मुख्य रूप से पुलिस और राजस्व विभाग से संबंधित हैं, इसके अलावा उत्पीड़न के मामलों में दी जाने वाली विभागीय एवं वित्तीय सहायता से संबंधित मामले भी आयोग के समक्ष आते हैं। आयोग कुछ मामलों में समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में समाचार रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान भी लेता है। इसके बाद आयोग ऐसे मामलों को नियमानुसार निपटाने का प्रयास करता है। उन्होने बताया कि जब मैंने आयोग के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला, उस समय आयोग में 342 मामले सुनवाई के लिए लंबित थे, जिसमें पुलिस विभाग के 280, राजस्व विभाग के 40 व अन्य विभाग से जुड़े 22 मामले लंबित थे। मेरे दो माह से कम के कार्यकाल के दौरान आयोग में कुल 801 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 440 प्रकरणों में 361 प्रकरणों को संबंधित विभागों से प्रतिवेदन मंगवाकर उनके स्तर पर निराकरण हेतु संबंधित विभागों को भेजा गया। आयोग ने उनका समाधान किया।
सरकार द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता सक्षम अधिकारियों द्वारा समय पर प्रदान नहीं की जाती है, ऐसी शिकायतें आयोग को भी प्राप्त होती हैं। मैंने वित्तीय सहायता से संबंधित मामलों का गंभीरता से संज्ञान लिया और उनका शीघ्र निराकरण कराया, जिसके फलस्वरूप दो माह से भी कम समय में पीड़ित परिवार को रु. 9,75,000.00 (नौ लाख पचहत्तर हजार रुपये मात्र) आर्थिक सहायता के रूप में आयोग के हस्तक्षेप से उपलब्ध कराई गई। इससे पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों को आर्थिक लाभ मिला और वे पुनर्वास की प्रक्रिया में जुट गए।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद, अपर जिलाधिकारी संदीप गुप्ता, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0रामजी वर्मा, उपजिलाधिकरी नवाबगंज पंकज सिंह, जिला विकास अधिकारी अजय सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी एसपी सिंह, अपर जिलासूचनाधिकारी सुश्री आरती वर्मा सहित सम्बन्धित विभागीय अधिकारी व मौजूद रहे।