औरैया (दीपक कुमार पाण्डेय) गेंहूँ की बुआई के लिए शीघ्रता करे किसान।डॉक्टर अंकुर झा

धान की फसल जो कटने के लिए रह गयी है उसे जल्दी काटकर गेंहूँ बोने के लिए खेतो को करे तैयार धान की पराली को जल्दी सड़ाने के लिए वेस्ट डी कम्पोजर का करे छिड़काव बुवाई से पूर्व डी एपी,यूरिया,एम् ओ पी उर्वरक का करे प्रयोग।बुवाई लेट होने के कारण किसान भाई देर से बोई जाने वाली गेंहू की प्रजातियों का चयन करे।धान की पराली और बेमौसम बारिस के कारण इस वर्ष गेंहूँ की बुवाई लेट कर दी है,इस वर्ष किसानो ने पराली को जलाया नही बल्कि खेत में ही सड़ाने के लिए पानी भर कर जुताई करा दी जिससे खेत में काफी दिनों तक अधिक नमी बनी रही खेत में ओट आने ही वाली थी कि तब तक बेमौसम हुई बारिस से खेत लबालब भर गए जो खेत भर गए वे अभी भी जुताई के काबिल नही हुए है।गेंहूँ की बुवाई का समय अब किसान के हाथो से निकलता जा रहा है 25 नवम्बर के बाद गेंहूँ की बुवाई लेट मानी जाती है लेट बुवाई में बीज और खाद अधिक लगता है जिससे लागत ज्यादा हो जाती है यदि उत्पादन अच्छा नही हुआ तो आर्थिक नुकसान किसानो को होता है।गेंहूँ की लेट बुवाई के कारण गेंहूँ की लेट बोई जाने वाली प्रजाति को बोना चाहिए तथा उर्वरको का प्रयोग भी विशेषज्ञों के बताये अनुसार ही करना चाहिए जिससे उत्पादन अच्छा हो सके जिससे किसान भाइयों को आर्थिक लाभ मिल सके।गेंहूँ की लेट बुवाई में क्या और कैसे करे तथा पराली का शीघ्र प्रवन्धन किस तरह करे एवं खेतो को गेंहूँ की बुवाई के लिए तैयार करने सम्बंधी जानकारी देते हुए सरपंच समाज कृषि विज्ञानं केंद्र परवाहा औरैया के पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉक्टर अंकुर झा ने बताया कि भारत में तकरीबन 388 मिलियन टन फसल अवशेष का उत्पादन हर साल होता है कुल फसल अवशेष का तकरीबन 27 फ़ीसदी गेहूं का अवशेष और 51 फ़ीसदी धान का अवशेष और बाकी दूसरी फसलों के अवशेष होते हैं जागरूकता की कमी की वजह से किसान भाई धान का फसल अवशेष को खेत में जला देते हैं जो कि खेत की मिट्टी व मानव जीवन के लिए काफी नुकसानदायक होता है धान के पुआल प्रबंधन हेतु किसान भाई खेत में ही जोत कर वेस्ट डी कंपोजर छिड़काव कर सिघ्रता से पुआल को खेत में ही सडा सकते है अथवा यूरिया का प्रयोग कर खेत में ही सडा दिया जाए तो मिट्टी के उर्वरक शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ इस का सीधा असर बीज जमने और उत्पादन पर भी पड़ता है किसान भाई ग्राम प्रधान से संपर्क कर धान की पराली को पशु आवास में भी दे सकते हैं। वह अपने ब्लॉक स्तरीय कृषि अधिकारी व ग्राम प्रधान से मिलकर कंपोस्ट पिट भी बनवा सकते हैं जिससे पराली का सही प्रबंधन किया का सके। जो कि कृषि विभाग द्वारा निशुल्क बनवाए जा रहे हैं अधिक जानकारी के लिए अपने ब्लॉक स्तरीय कृषि अधिकारी से संपर्क कर इस योजना का अधिक से अधिक लाभ ले।किसान भाई धान की फसल काटने के बाद गेहूं बोने की तैयारी शीघ्रता से करे बारिश हो जाने की वजह से किसान भाई को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है लिए सबसे पहले खेत को खोलकर नमी को दूर कर खेत को तैयार कर ले। गेहूं की बुवाई करने का उचित समय 25 नवम्बर है।किंतु लेट होने के कारण किसान भाई देर से बोने वाली गेहूं की पछेती प्रजातियां का चयन करें। खेत में बुवाई से पूर्व 30 किलो यूरिया, 50 किलो डी0ए0पी0 व 20 किलो एम0 ओ0 पी0 को मिलाकर सीडड्रिल से 50 कि भलो बीज को प्रति एकड़ की दर से निम्न प्रजातियों में से जैसे डी0बी0डब्ल्यू0 173, एचडी 3118, एचडी 550 , डी0बी0डब्ल्यू0 17 आदि को चयनित कर सकते है।