जयपुर। जयपुर विकास प्रधिकरण अवैध निर्माणों पर अभियान की तरह कार्रवाई करने के बजाए केवल छिटपुट तोड़फोड़ कर डर दिखा रहा है। बीते कुछ दिनों से जोन-14 वाटिका रोड पर इसी प्रकार की अनेक कार्रवाई की गई है लेकिन भूमाफिया के सामने प्रधिकरण भी नतमस्तक होता हुआ नजर आ रहा है। कुछ जगह पर तो जेडीए द्वारा तोड़ फोड़ की कार्रवाई करने निकला दस्ता मौके पर भी नहीं पहुंचा यदि गलती से पहुँच भी गया तो नाम मात्र का पीला पंजा दिखा कर वापस लोट जाता है । ऐसे में अवैध निर्माण करने वालों की पहचान तक नहीं हो पाती। अंकुश के लिए जुर्माने और विधिक कार्रवाई के दावे फेल हो चुके हैं। प्रवर्तन शाखा की इसी कार्यशैली के चलते कोर्ट तक अवैध निर्माण के मामले पहुंच रहे हैं। यूडीएच मंत्री तक कार्रवाई में पिक एंड चूज की शिकायतें हुई है।

मामला जयपुर स्थित वाटिका रोड जोन 14 का है जहां पर चंदलाई नहर के पास ग्राम श्यामपुर बुहारिया के खसरा नंबर 71,72,73,74,75,76,77,78,79,80,81,82,83,84,85,86,87,88,89 और 90 में अवैध रूप से श्रीराम एन्क्लेव नाम से कृषि भूमि पर अवैध रूप से कॉलोनी बनाई जा रही है | इसके अलावा सहभागिता अपार्टमेंट के पास कृति नगर-3 के नाम से अवैध रूप से कॉलोनी बसाई जा रही है| इन अवैध निर्माणों की वजह से जेडीए को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है लेकिन प्रवर्तन अधिकारीयों की सांठगांठ के चलते अवैध निर्माणकर्ताओं के हौसले बुलंद नज़र आ रहे है| सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि बैक डेट में इन अवैध निर्माणों पर सोसाइटी के पट्टे भी दिए जा रहे है जिससे पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग को भी भारी मात्रा में राजस्व का नुकसान हो रहा है लेकिन सम्बंधित विभाग मूकदर्शक बन कर सब कुछ देख रहा है|
जब हमारे संवाददता ने वस्तुस्थिति जानने की कोशिश में स्थानीय लोगों से बात की तो पता चला कि विगत काफी दिनों से जेडीए की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई हालाँकि एक दो दिन महीनों पहले जेडीए के लोग आये जरूर थे लेकिन कोई भी कार्यवाई नहीं हुई। यहां मसला केवल एक कॉलोनी का नहीं है जॉन 14 में लगभग चारों तरफ अवैध कॉलोनियों का बोलबाला है।

जिम्मेदारों की प्रतिक्रिया

ज़ोन 14 के प्रवर्त्तन अधिकारी धर्मसिंह मीना से शाम 7 बजकर 11 मिनट पर हमारे संवाददाता ने फ़ोन कर इस मामले पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने बताया कि मैं अभी छुट्टी पर हूँ , आपको जो भी जानकारी चाहिए आप जेडीए संपर्क कर सकते है, यह कहते हुए फ़ोन काट दिया |
आप इस जबाब से समझ सकते है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही इस तरह के अवैध निर्माणों पर चुप्पी साधे हुए है तो कार्रवाई कैसे हो ?

देखने की बात यह भी होगी कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले को संज्ञान में आते ही कार्रवाई करते है या फिर पहले की तरह ये सभी अवैध निर्माण ज्यों की त्यों चलते रहेंगे ???