कवि ओ पी वर्मा ओम की मनाई गई 47वीं वैवाहिक वर्षगांठ

कवि ओ पी वर्मा ओम की मनाई गई 47वीं वैवाहिक वर्षगांठ

निष्पक्ष जनअवलोकन बाराबंकी।वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ओ पी वर्मा 'ओम' जी की सैंतालीसवीं वैवाहिक वर्षगांठ मतदाता जागरूकता को समर्पित करके मोहल्ला दीनदयाल नगर में मनायी गई। 'मानव होना भाग्य है कवि होना सौभाग्य' जो लोग कवि कर्म अर्थात् साहित्यिक सर्जना में लगे हैं, उन्हें भारतीय मान्यता साधारण मानवों से कुछ ऊपर रखती है। व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव लल्लू के संचालन में डॉ अम्बरीष अम्बर ने मां भारती की वंदना की--

'पुकारूं जब सरस्वति मां तो बन विश्वास आ जाना।

सृजन की पंक्तियों में फिर संवरकर खाश आ जाना।

भयंकर आंधियों में ज्ञान का दीपक फंसे जब तो,बढ़ाती प्यार का पल्लू तू मेरे पास आ जाना।।'स्वास्थ्य विभाग से सेवा.नि. संयुक्त निदेशक फार्मेसी सियाराम रावत वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाएं देने के बाद पढ़ा -

'करना हमें भी कुछ यह ठान लीजिए।मतदान महा पर्व सम्मान कीजिये। जनतंत्रऔर संविधान की सुरक्षा हेतु ,

मतदान कीजिए मतदान कीजिए ।।'दीपक दिवाकर ने ओजस्वी काव्य पाठ किया --

' मिट जायेंगे हम लेकिन अहसास नहीं मिटने देंगे।

हम अपना गौरवशाली इतिहास नहीं मिटने देंगे।।'अनिल श्रीवास्तव लल्लू ने पढ़ा-' हम सब प्यारे 'मत'वाले हैं। संविधान के रखवाले हैं।

 सर्वप्रथम मतदान है करना,

 संकल्प यही मन में पाले हैं।।'

ओजकवि ओम ने निवेदन किया -आओ चलोचलें मतदान के लिए देश के नवल निर्माण के लिए।अपने भी मत का सम्मान करेंगे।शत् प्रतिशत मतदान करेंगे।।'डॉ अम्बर ने पढ़ा-ये वोटिंग बढ़ चले ऐसी कला इन्वेंट करना है।

इस अनिवार्य करना है इसे अर्जेंट करना है।जहां कुछ लोग ही मतदान करने जाया करते थे,वहीं इसको बढ़ाकर शीघ्र सौ परसेंट करना है।।'

इसके अतिरिक्त पूर्व बैंक कैशियर योगेन्द्र नाथ वर्मा, फौजी अखिलेश वर्मा, जय प्रकाश हुंकारी, शंभू नाथ वर्मा, जवाहरलाल वर्मा, युवान सिंह तथा श्रेष्ठा सिंह आदि की गरिमामई उपस्थिति रही ।